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भारत में दस लाख से अधिक जनसख्या वाले नगरों जीवंत पर्यावरण से समन्धित समस्याओं

भारत में दस लाख से अधिक जनसख्या वाले नगरों  जीवंत पर्यावरण से समन्धित समस्याओं की विवेचना कीजिये। इनका प्रबंधन कैसे किया जा सकता है? (UPSC-2020, 10 Marks, 150 words)

Answer:


जीवंत पर्यावरण का अर्थ है प्राकृतिक और सांस्कृतिक वातावरण का एक संयोजन जो निवासी द्वारा उपयोग किया जाता है। भूमि, मिट्टी, पानी, सड़क, मकान, बिजली, स्कूल, अस्पताल, गांव, शहर, शहर की संरचना आदि सभी जीवंत पर्यावरण के अंग हैं।

शहरों के लिए आवश्यक जीवंत वातावरण निम्नलिखित हैं:

  • हवा की अच्छी गुणवत्ता।
  • शांतिपूर्ण वातावरण जैसे सीमित शोर, कम अपराध दर, स्वतंत्रता आदि।
  • आवास, सड़क, स्कूल, अस्पताल, पार्क आदि जैसी पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता।
  • पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाले पेयजल की उपलब्धता।
  • अच्छा काम करने का माहौल और शांतिपूर्ण शासन प्रणाली।
  • स्वस्थ वनस्पति और जीव।

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में कुल 46 से अधिक दस लाख जनसख्या वाले शहरों है। अनियोजित विकास और अनियोजित प्रवासन के कारण, सभी दस लाख से अधिक जनसख्या वाले नगरों में लगभग समान प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

 भारत में दस लाख से अधिक जनसख्या वाले नगरों  जीवंत पर्यावरण से समन्धित समस्याएं निम्नलिखित हैं;

झुग्गी बस्ती संबंधी समस्याएं:

  • बढ़ती झुग्गियां बस्तियाँ आजकल शहरों में मुख्य समस्याओं में से एक हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याएं:

  • पीने योग्य पानी की कमी
  • आवास की कमी
  • बिजली की कटौती
  • बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
  • आवागमन और भीड़भाड़
  • सड़क में गड्ढे

पर्यावरण संबंधी समस्याएं

  • वायु, जल, शोर प्रदूषण।
  • भूजल की कमी और सतही जल की गुणवत्ता में गिरावट।
  • वन और वनस्पति का अवक्षेपण
  • शहरी गर्मी-द्वीप प्रभाव
  • शहरी बाढ़

सामाजिक समस्याएं

  • भीड़
  • महिला के खिलाफ बढ़ता अपराध
  • शहरी अपराध
  • शहरी गरीबी

वित्त समस्या;

  • नगर निगमों क पास पैसे की कमी

इन समस्याओं को प्रबंधन करने का निम्न तरीका;

  • शहरों को स्वयं के मामलों का प्रबंधन करने के लिए आर्थिक रूप से स्वालम्ब बनाना होगा।
  • भीड़भाड़ को नियंत्रित करने के लिए अनियोजित प्रवासन को कम करना होगा। शहरी प्रवास को कम करने के लिए स्मार्ट गांव की अवधारणा को भी लागू किया जाना चाहिए।
  • पर्यावरण संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए सतत विकास के तरीकों को अपनाया जाना चाहिए।
  • शहरी बाढ़ और पानी की कमी को नियंत्रित करने के लिए जलशोषक/ स्पंज (sponge) शहर की अवधारणा की  कार्यान्वयन।
  • विकास योजना के कार्यान्वयन के लिए हर स्तर पर लोगों की भागीदारी को निर्धारित करना होगा।
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