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भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन क्यों होता है? कारण बताइए।

 प्रश्न।

भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन क्यों होता है? कारण बताइए।

( अध्याय - 4  जलवायु, कक्षा  9 NCERT समकालीन भारत-1 )

उत्तर।

वायु की दिशा का मौसमी परिवर्तन केवल भारतीय उपमहाद्वीप में ही नहीं बल्कि 20 डिग्री उत्तर और दक्षिण अक्षांशों के बीच दोनों गोलार्द्धों में स्थित भौगोलिक क्षेत्रों में भी होता है। भारत के अद्वितीय स्थान के कारण भारतीय उपमहाद्वीप में हवा की दिशा का मौसमी परिवर्तन सबसे व्यापक रूप में है।


भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा [मानसून हवाओं] के मौसमी परिवर्तन का मुख्य कारण कर्क रेखा (23.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश) और मकर रेखा (23.5 डिग्री दक्षिण अक्षांश) के बीच सूर्य की आभासी संचलन है।


गर्मियों में, जब मध्याह्न सूर्य की किरणें भारत के मध्य (कर्क रेखा) के ऊपर होती हैं, तो भारतीय भूभाग गर्म हो जाता है, और भारत के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भाग में कम वायुमंडलीय दाब बनता है। इसलिए समुद्र से [उच्च वायुमंडलीय दबाव से] हवा भारतीय उपमहाद्वीप [कम वायुमंडलीय दबाव की ओर] की ओर चलती है।


शीतकाल में, ठीक विपरीत,  जब सूर्य दक्षिण की ओर गमन करता है और मध्यान्ह सूर्य की किरणें भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर नहीं पड़ती हैं, तब भारतीय उपमहाद्वीप में उच्च वायुमण्डलीय दाब तथा हिन्द महासागर पर निम्न वायुमण्डलीय दाब बनता है, फलस्वरूप वायु भारतीय उपमहाद्वीप से समुद्र की ओर चलती है।


तो हम कह सकते है , कर्क रेखा (23.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश) और मकर रेखा (23.5 डिग्री दक्षिण अक्षांश) के बीच सूर्य की आभासी संचलन व् भारतीय उपमहाद्वीप और हिंद महासागर के असमान ताप और शीतलन के कारण भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा का मौसमी परिवर्तन होता है।


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