इस अध्याय में आर्थिक गतिविधियाँ तथा गैर-आर्थिक गतिविधियाँ के बारे बे बताया गया तथा यह भी बताया गया है की दोनों गतिविधियों का क्या उपयोगिता है। चलिए हम दोनों गतिविधियों को विस्तार से पढ़ते है -
आर्थिक गतिविधियाँ:
वे गतिविधियाँ जिनमें धन, मुद्रा या वस्तुओं का नकद मूल्य सम्मिलित होता है और जिसका उद्देश्य आय या संपत्ति अर्जित करना होता है, आर्थिक गतिविधियाँ कहलाता है।
उदाहरण:
- व्यापारी द्वारा सामान बेचना,
- किसान द्वारा फसल बेचना,
- वकील द्वारा शुल्क लेना,
- चालक द्वारा माल ढोना,
- मजदूर द्वारा कारखाने में काम करना।
गैर-आर्थिक गतिविधियाँ:
वे कार्य जिनका उद्देश्य पैसे कमाना नहीं होता बल्कि प्रेम, सेवा, कर्तव्य या आदर की भावना से करते है, गैर-आर्थिक गतिविधियाँ कहलाता है।
उदाहरण:
- माता जी द्वारा परिवार के लिए भोजन बनाना,
- पिता जी द्वारा बच्चों की पढ़ाई में सहायता करना,
- परिवार के सदस्यों द्वारा बुज़ुर्गों की सेवा करना,
- सब मिलकर त्यौहार मनाना
अनु और कबीर की कहानी से गतिविधियों के प्रकार :
गीता मौसी (वायुसेना पायलट) वेतन पाती हैं → यह आर्थिक गतिविधि है।
रोहन (सॉफ़्टवेयर कंपनी कर्मचारी) वेतन पाता है → आर्थिक गतिविधि।
रोहन सप्ताहांत में युवाओं को नि:शुल्क कंप्यूटर कौशल सिखाता है → गैर-आर्थिक गतिविधि।
महत्त्वपूर्ण शब्दावली:
वस्तु का नकद मूल्य:
किसी वस्तु का मौद्रिक मूल्य जो उससे मिलने वाले लाभ पर आधारित होता है।
बाज़ार:
वह स्थान जहाँ वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन होता है, मुख्यतः धनराशि के रूप में।
शुल्क:
सेवाओं या परामर्श के बदले दिया गया भुगतान (जैसे डॉक्टर, वकील को) को शुल्क कहते हैं।
वेतन:
नियोजक द्वारा कर्मचारी को नियमित रूप से दिया जाने वाला मासिक भुगतान को वेतन कहते है।
आर्थिक गतिविधियों के प्रकार :
आर्थिक गतिविधियाँ वे कार्य हैं जिनमें मौद्रिक मूल्य (धन या वस्तु के रूप में भुगतान) सम्मिलित होता है।
इन गतिविधियों से वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन, वितरण और उपभोग होता है।
विभिन्न उदाहरण:
तकनीशियन और मजदूर – निर्माण कंपनी में बुलडोज़र चलाने पर मासिक वेतन मिलता है।
डाकघर कर्मचारी – नियमित वेतन के रूप में भुगतान।
ऑनलाइन कक्षाएँ – विद्यार्थियों को पढ़ाने पर शुल्क (फीस) प्राप्त होता है।
खेती करने वाला श्रमिक – दैनिक मजदूरी के साथ-साथ वस्तु के रूप में भुगतान (आम) भी प्राप्त करता है।
भुगतान के रूप:
वेतन (Salary): नियोजक द्वारा कर्मचारी को नियमित मासिक भुगतान।
शुल्क (Fee): विशेष सेवा (जैसे अध्यापन, परामर्श) के लिए लिया गया भुगतान।
मजदूरी (Wages): श्रमिक को काम के बदले दैनिक/साप्ताहिक भुगतान।
वस्तु के रूप में भुगतान: नकद की बजाय वस्तुओं में दिया गया भुगतान।
मूल्य संवर्धन (Value Addition):
वस्तु को एक रूप से दूसरे रूप में बदलने से उसके मूल्य में वृद्धि होती है।
उदाहरण: राजेश ने 600 रुपये की लकड़ी से कुर्सी बनाई और 1000 रुपये में बेची। अतिरिक्त 400 रुपये उसका कौशल, समय और प्रयास का मूल्य है
गैर-आर्थिक गतिविधियों का महत्त्व :
गैर-आर्थिक गतिविधियों में धन का लेन-देन नहीं होता, फिर भी इनसे उत्पन्न मूल्य हमारे जीवन और समाज के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण होते हैं।
ये गतिविधियाँ संतोष, कृतज्ञता, सेवा और सामाजिक सहयोग की भावना को बढ़ाती हैं।
सेवा कार्य:
धार्मिक और सामुदायिक स्थानों पर नि:स्वार्थ सेवा की जाती है।
उदाहरण: गुरुद्वारे में ‘लंगर’ (सामुदायिक रसोई) में सभी श्रद्धालुओं को नि:शुल्क भोजन कराना।
ऐसे कार्यों से संतुष्टि और कृतज्ञता की अनुभूति होती है।
सामुदायिक सहभागिता:
स्वच्छ भारत अभियान – नागरिक मिलकर घर, गली, सड़क, पार्क और सार्वजनिक स्थान साफ रखते हैं।
वन महोत्सव – वृक्षारोपण और वन संरक्षण के लिए लोगों को एक साथ जोड़ता है।

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