गुप्त काल : अथक सृजनशीलता का युग पर बहुविकल्पीय प्रश्न,
अध्याय 7 कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पर बहुविकल्पीय प्रश्न NCERT,
अध्याय 7 गुप्त काल : अथक सृजनशीलता का युग पर बहुविकल्पीय प्रश्न,
गुप्त काल : अथक सृजनशीलता का युग पर प्रश्नोत्तरी,
अध्याय 7 कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पर प्रश्नोत्तरी NEW NCERT reprint 2025-26,
अध्याय 7 गुप्त काल : अथक सृजनशीलता का युग पर प्रश्नोत्तरी,
इस पोस्ट में कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान (इतिहास) के अध्याय 7 – “गुप्त काल : अथक सृजनशीलता का युग” पर आधारित महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ Quiz) प्रस्तुत किए गए हैं। यह क्विज NEW NCERT Reprint 2025–26 के अनुसार तैयार किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की सही और अद्यतन तैयारी में सहायता मिलेगी।
गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। इस अध्याय में कला, स्थापत्य, विज्ञान, गणित, साहित्य, प्रशासन और सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया जाता है। प्रस्तुत MCQs इन सभी विषयों को कवर करते हैं और विद्यार्थियों की अवधारणात्मक समझ (conceptual clarity) को मजबूत करते हैं।
यह क्विज विशेष रूप से उपयोगी है:
- कक्षा 7 के छात्रों के लिए
- NCERT आधारित परीक्षा तैयारी के लिए
- स्कूल टेस्ट, यूनिट टेस्ट और वार्षिक परीक्षा हेतु
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हर प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से तैयार किया गया है, जिससे छात्रों में तार्किक सोच, तेज़ पुनरावृत्ति और आत्मविश्वास विकसित होगा।
यदि आप गुप्त काल : अथक सृजनशीलता का युग MCQ, Class 7 History Quiz, या NCERT अध्याय 7 प्रश्नोत्तरी की खोज कर रहे हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए एक संपूर्ण अध्ययन सामग्री है।
1. महरौली ( दिल्ली) का लौह स्तंभ किस राजा से संबंधित है?
क) चंद्रगुप्त मौर्य
ख) अशोक
ग) चंद्रगुप्त द्वितीय
घ) कनिष्क
उत्तर: ग) चंद्रगुप्त द्वितीय
दिल्ली के लौह स्तंभ पर उत्कीर्ण लेख में ‘चंद्र’ नामक एक राजा का उल्लेख मिलता है, जिसकी पहचान गुप्त वंश के प्रसिद्ध शासक चंद्रगुप्त द्वितीय से की जाती है (इन्हें मौर्य वंश के चंद्रगुप्त मौर्य से भ्रमित नहीं होना चाहिए)।
चंद्रगुप्त द्वितीय को ‘विक्रमादित्य’ भी कहा जाता था। वे भगवान विष्णु के उपासक थे और उनके वाहन गरुड़ का उल्लेख कई अभिलेखों में मिलता है।
2. प्रयागराज स्थित स्तंभ लेख ‘प्रयाग प्रशस्ति’ किस राजा से संबंधित है?
क) चंद्रगुप्त प्रथम
ख) समुद्रगुप्त
ग) चंद्रगुप्त द्वितीय
घ) विक्रमादित्य
उत्तर: ख) समुद्रगुप्त
प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त (चंद्रगुप्त द्वितीय के पिता) की उपलब्धियों की प्रशंसा की गई है।
इस अभिलेख के लेखक, दरबारी कवि हरिषेण, के अनुसार राजा का उद्देश्य ‘धरणी-बन्ध’ अर्थात पृथ्वी को एक करना था। इसके लिए समुद्रगुप्त ने अनेक युद्ध किए, राजाओं को पराजित किया और अपने साम्राज्य का विस्तार किया।
3. हरिषेण निम्नलिखित में से किस राजा के दरबारी कवि थे?
क) चंद्रगुप्त प्रथम
ख) समुद्रगुप्त
ग) चंद्रगुप्त द्वितीय
घ) विक्रमादित्य
उत्तर: ख) समुद्रगुप्त
4. निम्नलिखित में से किस राजा को वीणा वादक के रूप में दर्शाया गया है?
क) चंद्रगुप्त प्रथम
ख) समुद्रगुप्त
ग) चंद्रगुप्त द्वितीय
घ) विक्रमादित्य
उत्तर: ख) समुद्रगुप्त
समुद्रगुप्त द्वारा जारी किए गए एक सिक्के में उन्हें वीणा बजाते हुए दर्शाया गया है, जिससे उनके कला प्रेम का पता चलता है।
5. चीनी यात्री फाह्यान ( फा-शियन) भारत कब आए थे?
क) मौर्य काल
ख) कुषाण काल
ग) गुप्त काल
घ) शक काल
उत्तर: ग) गुप्त काल
चीनी यात्री फाह्यान (Fa-Hien) ने भारत की यात्रा ईसा की 5वीं शताब्दी के आरंभ में गुप्त काल के दौरान की थी।
6. सोकोत्रा द्वीप किस सागर में स्थित है?
क) भूमध्य सागर
ख) बंगाल की खाड़ी
ग) अरब सागर
घ) दक्षिण चीन सागर
उत्तर: ग) अरब सागर
सोकोत्रा द्वीप, अरब सागर में रणनीतिक रूप से स्थित था और गुप्त काल में भारत से भूमध्य सागर की ओर होने वाले व्यापार में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। जो आज यमन का भाग है।
7. गुप्त शासक मुख्यतः किस देवता के उपासक थे?
क) लक्ष्मी
ख) शिव
ग) विष्णु
घ) अग्नि
उत्तर: ग) विष्णु
गुप्त शासक मुख्य रूप से विष्णु के भक्त थे, जिसका प्रमाण उनके सिक्कों और अभिलेखों में मिलता है।
हालाँकि, वे अन्य धर्मों के प्रति भी सहिष्णु थे और उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय सहित कई बौद्ध विहारों को संरक्षण दिया।
8. कालिदास किस वंश के समकालीन थे?
क) मौर्य वंश
ख) कुषाण वंश
ग) गुप्त वंश
घ) शक वंश
उत्तर: ग) गुप्त वंश
गुप्त काल में संस्कृत साहित्य का उत्कर्ष हुआ। कालिदास की रचनाएँ, अनेक पुराण, तथा गणित व खगोल विज्ञान में आर्यभट्ट और वराहमिहिर के कार्य इसी काल की देन हैं। धातु विज्ञान में भी प्रगति हुई, जिसका उदाहरण जंग-रहित लौह स्तंभ है।
9. ‘बृहत्संहिता’ की रचना किसने की थी?
क) कालिदास
ख) आर्यभट्ट
ग) वराहमिहिर
घ) हरिषेण
उत्तर: ग) वराहमिहिर
वराहमिहिर एक महान गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और ज्योतिषी थे। वे उज्जयिनी में रहते थे।
उनकी प्रसिद्ध रचना ‘बृहत्संहिता’ में खगोल, ज्योतिष, मौसम विज्ञान, वास्तुकला, नगर योजना और कृषि जैसे अनेक विषयों का वर्णन है।
10. आर्यभट्ट किस वंश के समकालीन थे?
क) मौर्य वंश
ख) कुषाण वंश
ग) गुप्त वंश
घ) शक वंश
उत्तर: ग) गुप्त वंश
आर्यभट्ट लगभग 500 ईस्वी में कुसुमपुर (वर्तमान पटना के निकट) में रहते थे। उन्होंने गणित और खगोल विज्ञान पर प्रसिद्ध ग्रंथ ‘आर्यभटीय’ की रचना की।
उन्होंने वर्ष की अवधि 365 दिन, 6 घंटे, 12 मिनट और 30 सेकंड बताई, जो आधुनिक गणना के बहुत निकट है।
आर्यभट्ट ने पृथ्वी के आकार का अच्छा अनुमान लगाया तथा सूर्य और चंद्र ग्रहण की सही व्याख्या की।
11. ‘मेघदूतम्’ की रचना किसने की थी?
क) कालिदास
ख) आर्यभट्ट
ग) वराहमिहिर
घ) हरिषेण
उत्तर: क) कालिदास
कालिदास: कालिदास के जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। किंवदंतियों के अनुसार, प्रारंभ में उनका उपहास किया गया था, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने कठोर परिश्रम किया और अपने जीवन को बदल दिया। वे संस्कृत साहित्य में अपने अमूल्य योगदान और अत्यंत परिष्कृत काव्य शैली के लिए प्रसिद्ध हैं।
12. प्रभावती गुप्ता किस राजा की पुत्री थीं?
क) चंद्रगुप्त प्रथम
ख) समुद्रगुप्त
ग) चंद्रगुप्त द्वितीय
घ) वाकाटक राजा
उत्तर: ग) चंद्रगुप्त द्वितीय
प्रभावती गुप्ता, चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री थीं और उनका विवाह दक्षिण भारत के वाकाटक वंश के एक राजकुमार से हुआ था।
प्रभावती गुप्ता को विष्णु तथा उनके अवतारों को समर्पित सात मंदिरों के निर्माण से भी जोड़ा जाता है।
इनमें से कुछ मंदिर वर्तमान महाराष्ट्र के रामगिरि (रामटेक पहाड़ी) क्षेत्र में स्थित हैं।
केवला नरसिंह मंदिर भगवान नरसिंह को समर्पित है।
13. गुप्त काल के दौरान दक्षिण भारत में कौन-सा वंश शक्तिशाली रूप में उभरा?
क) चोल
ख) चेर
ग) पांड्य
घ) पल्लव
उत्तर: घ) पल्लव
जब उत्तर भारत में गुप्त शासन कर रहे थे, उसी समय दक्षिण भारत में पल्लव वंश एक शक्तिशाली राजवंश के रूप में उभरा। उन्होंने वर्तमान तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ भागों में अपनी सत्ता स्थापित की।
उनकी उत्पत्ति स्पष्ट नहीं है, परंतु माना जाता है कि वे प्रारंभ में सातवाहनों के अधीन एक अधीनस्थ शक्ति थे।
14. पल्लवों की राजधानी क्या थी?
क) मदुरै
ख) अमरावती
ग) पैठन
घ) कांचीपुरम
उत्तर: घ) कांचीपुरम
पल्लवों की राजधानी कांचीपुरम (वर्तमान तमिलनाडु) थी। इसे ‘हज़ार मंदिरों का नगर’ भी कहा जाता है।
यह दक्षिण भारत के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में से एक था। सातवाहन काल में विकसित घटिकाओं (शिक्षा केंद्रों) ने यहाँ बौद्धिक और शैक्षिक वातावरण को बढ़ावा दिया।
15. प्राग्ज्योतिष प्राचीन काल में किस राज्य का नाम था?
क) उत्तराखंड
ख) मणिपुर
ग) असम
घ) केरल
उत्तर: ग) असम
असम की ब्रह्मपुत्र घाटी का प्राचीन नाम प्राग्ज्योतिष था। इसका उल्लेख रामायण और महाभारत दोनों ग्रंथों में मिलता है।
16. ‘हज़ार मंदिरों का नगर’ किसे कहा जाता है?
क) काशी
ख) अमरावती
ग) पैठन
घ) कांचीपुरम
उत्तर: घ) कांचीपुरम
17. जाटक कथाओं को दर्शाने वाली रंगीन गुफा चित्रकला के लिए कौन-सी गुफाएँ प्रसिद्ध हैं?
क) उदयगिरि
ख) अजंता
ग) एलोरा
घ) कार्ले
उत्तर: ख) अजंता
अजंता की गुफाएँ (वर्तमान महाराष्ट्र) अपनी भव्य और रंगीन भित्ति चित्रकला के लिए प्रसिद्ध हैं।
इन गुफाओं का निर्माण गुप्त और वाकाटक शासकों के संरक्षण में हुआ। यहाँ बुद्ध के जीवन और जाटक कथाओं को अत्यंत सुंदर चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है।
18. विष्णु सहित हिंदू देवताओं की उत्कृष्ट शिल्पकला वाली शैल-कट गुफाएँ किस स्थान पर स्थित हैं?
क) उदयगिरि
ख) अजंता
ग) एलोरा
घ) कार्ले
उत्तर: क) उदयगिरि
मध्य प्रदेश स्थित उदयगिरि की गुफाएँ गुप्त कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
यहाँ हिंदू देवताओं, विशेषकर विष्णु की सुंदर शैल-नक्काशी देखने को मिलती है।
यहाँ स्थित 6 टन वजनी लौह स्तंभ का निर्माण चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में हुआ था, जिसे बाद में दिल्ली लाया गया।
19. गुप्त साम्राज्य की राजधानी क्या थी?
क) पाटलिपुत्र
ख) नंदिवर्धन
ग) उज्जयिनी
घ) काशी
उत्तर: क) पाटलिपुत्र
20. गुप्त साम्राज्य के दौरान शिक्षा का प्रमुख केंद्र कौन-सा नगर था?
क) पाटलिपुत्र
ख) नंदिवर्धन
ग) उज्जयिनी
घ) काशी
उत्तर: ग) उज्जयिनी
उज्जयिनी शिक्षा और विद्वत्ता का एक प्रमुख केंद्र था।
वराहमिहिर जैसे महान गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और ज्योतिषी यहीं रहते थे।
21. वाकाटक वंश की राजधानी क्या थी?
क) पाटलिपुत्र
ख) नंदिवर्धन
ग) उज्जयिनी
घ) काशी
उत्तर: ख) नंदिवर्धन
वाकाटक वंश ने उपमहाद्वीप के मध्य भाग में शासन किया। उनकी राजधानी नंदिवर्धन (वर्तमान नागपुर के निकट) थी।
22. कामरूप राज्य आधुनिक काल में किस क्षेत्र में स्थित था?
क) राजस्थान
ख) असम
ग) मणिपुर
घ) झारखंड
उत्तर: ख) असम
कामरूप राज्य आधुनिक असम के कुछ भागों में फैला हुआ एक महत्वपूर्ण प्राचीन राज्य था।
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