प्रश्न.
अध्याय में दी गई जानकारी के आधार पर बताइए कि भारत को 'लघु महाद्वीप' क्यों कहा जाता है?
(भारत की भौगोलिक विविधता - अध्याय 1 - कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान NCERT)
उत्तर.
भारत को ‘लघु महाद्वीप’ कहा जाता है क्योंकि एक ही देश के भीतर महाद्वीप जैसी भौतिक और सांस्कृतिक विविधता पाई जाती है।
भारत को ‘लघु महाद्वीप’ कहे जाने का प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. स्थलरूपों (भूमि आकृतियों) में विविधता
भारत में लगभग वे सभी प्रमुख स्थलरूप पाए जाते हैं जो किसी महाद्वीप में होते हैं, जैसे—
- ऊँचे पर्वत (हिमालय)
- विस्तृत और उपजाऊ मैदान (उत्तरी मैदान)
- गरम और शीत मरुस्थल (थार मरुस्थल और लद्दाख)
- पठार (प्रायद्वीपीय पठार)
- लंबा समुद्रतट और द्वीप समूह (लक्षद्वीप, अंडमान एवं निकोबार)
2. जलवायु की विविधता
भारत में विभिन्न प्रकार की जलवायु मिलती है—
- लद्दाख जैसे अत्यधिक ठंडे क्षेत्र
- राजस्थान के अत्यधिक गरम मरुस्थल
- उत्तर-पूर्व भारत में अत्यधिक वर्षा
- दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में समशीतोष्ण जलवायु
इतनी विविध जलवायु सामान्यतः महाद्वीपों में मिलती है, न कि किसी एक देश में।
3. समृद्ध प्राकृतिक संसाधन
भारत के विभिन्न भागों में नदियाँ, वन, खनिज, उपजाऊ मिट्टी और जैव विविधता पाई जाती है। इससे कृषि, मत्स्य पालन, खनन और व्यापार जैसे विविध व्यवसाय संभव होते हैं। ऐसी विविधता प्रायः महाद्वीप स्तर पर देखी जाती है।
4. सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता
भारत में महाद्वीप जैसी सांस्कृतिक विविधता है। अलग-अलग क्षेत्रों में—
- भाषाएँ
- खान-पान
- पहनावा
- त्योहार और परंपराएँ
भिन्न-भिन्न हैं। लोग अपने भौगोलिक वातावरण के अनुसार जीवन शैली अपनाते हैं—पर्वतीय क्षेत्र, मरुस्थल, तटीय क्षेत्र और मैदानों में रहने वाले लोगों की जीवन शैली अलग-अलग होती है।
स्थलरूपों, जलवायु, प्राकृतिक संसाधनों और संस्कृति में महाद्वीपीय स्तर की विविधता होने के कारण भारत को उचित ही ‘लघु महाद्वीप’ कहा जाता है।
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