Search Post on this Blog

‘प्रकृति की कोई सीमा नहीं होती’ इस कथन से आप क्या समझते हैं? | कक्षा 5 EVS, अध्याय 10 : पृथ्वी — हम सबका घर

 प्रश्न

‘प्रकृति की कोई सीमा नहीं होती’ इस कथन से आप क्या समझते हैं?

(कक्षा 5 EVS, अध्याय 10 : पृथ्वी — हम सबका घर)

उत्तर


प्राचीन भारत में एक सुंदर वचन कहा गया है— "वसुधैव कुटुम्बकम्", जिसका अर्थ है "संपूर्ण विश्व एक परिवार है।" यह विचार हमें सिखाता है कि सभी मनुष्य, पशु-पक्षी, वनस्पतियाँ, नदियाँ, पर्वत, वायु और महासागर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और हम सबका घर है पृथ्वी , इसलिए पृथ्वी को हम माता मानते है। 

‘प्रकृति की कोई सीमा नहीं होती’ इस कथन से आप क्या समझते हैं?


जब हम कहते हैं कि "प्रकृति की कोई सीमा नहीं होती", तो उसका अर्थ है कि प्रकृति मनुष्यों द्वारा बनाई गई सीमाओं को नहीं मानती। नदियाँ, पवन, बादल, पक्षी, जीव-जंतु और यहाँ तक कि पर्यावरणीय समस्याएँ भी देशों और महाद्वीपों की सीमाओं से बँधी नहीं होतीं।


निम्नलिखित उदाहरण बताते हैं कि प्रकृति की कोई सीमा नहीं होती—


1. जीव-जंतु मनुष्य द्वारा बनाई गई सीमाओं को पार करते हैं


अनेक पशु और पक्षी भोजन, जल तथा अनुकूल जलवायु की खोज में एक देश से दूसरे देश तक जाते हैं। वे मनुष्यों द्वारा बनाई गई सीमाओं का पालन नहीं करते।


उदाहरण के लिए, प्रत्येक शीत ऋतु में हजारों साइबेरियन सारस साइबेरिया से भारत आते हैं। वे अत्यधिक ठंड से बचने और भोजन से भरपूर आर्द्र क्षेत्रों की खोज में लंबी यात्रा करते हैं।


2. नदियाँ अनेक देशों से होकर बहती हैं


कई नदियाँ समुद्र तक पहुँचने से पहले विभिन्न राज्यों और देशों से होकर बहती हैं। जल अलग-अलग स्थानों पर रहने वाले लोगों को जोड़ता है। ये सब मनुष्यों द्वारा बनाई गई सीमाओं का पालन नहीं करते।


उदाहरण के लिए, सिंधु नदी तिब्बत से निकलकर भारत और फिर पाकिस्तान से होकर बहती है।


3. वायु और पवन हर स्थान तक पहुँचती हैं


वायु किसी नगर, राज्य या देश की सीमा पर नहीं रुकती। पवन अपने साथ नमी, बीज, परागकण तथा धूल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है।


4. बादल और वर्षा मनुष्यों द्वारा बनाई गई सीमाओं से बँधे नहीं होते


बादल महासागरों के ऊपर बनते हैं और लंबी दूरी तय करके विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा करते हैं। वर्षा का लाभ अनेक स्थानों को मिलता है, चाहे वे किसी भी राज्य या देश में हों।


5. प्राकृतिक आपदाएँ बड़े क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं


बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूकम्प तथा वनाग्नि जैसी प्राकृतिक आपदाएँ एक साथ कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती हैं। प्रकृति राज्यों और देशों में भेद नहीं करती।


6. पर्यावरणीय समस्याएँ वैश्विक होती हैं


जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और जैव विविधता में कमी जैसी समस्याएँ पूरे विश्व को प्रभावित करती हैं। इन चुनौतियों का समाधान सभी देशों के सहयोग से ही संभव है।


7. सभी जीव एक-दूसरे से जुड़े हैं


वनस्पतियाँ हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) प्रदान करती हैं। पशु-पक्षी प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायता करते हैं। मनुष्य भोजन, जल और आश्रय के लिए प्रकृति पर निर्भर है। प्रत्येक जीव इस विशाल प्राकृतिक परिवार का एक महत्त्वपूर्ण भाग है।


अतः हम कह सकते हैं कि "प्रकृति की कोई सीमा नहीं होती" का अर्थ है कि नदियाँ, वायु, बादल, पक्षी तथा पर्यावरणीय परिवर्तन मनुष्यों द्वारा बनाई गई सीमाओं को नहीं मानते। पृथ्वी पर सभी सजीव और निर्जीव तत्व एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और परस्पर निर्भर हैं।

Previous
Next Post »