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क्या लोक प्रशासन पर न्यायिक नियंत्रण आवश्यक है? लोक प्रशासन पर संभावित न्यायिक नियंत्रण के विभिन्न रूपों की व्याख्या कीजिए। | UPPSC ethics paper 2021 solutions | नीति अखंडता एवं अभिक्षमता UPSC नोट्स

 प्रश्न। 

क्या लोक प्रशासन पर न्यायिक नियंत्रण आवश्यक है? लोक प्रशासन पर संभावित न्यायिक नियंत्रण के विभिन्न रूपों की व्याख्या कीजिए।

(UPPSC GS paper 4 2021)

उत्तर।

लोक प्रशासन पर न्यायिक नियंत्रण का मतलब है न्यायपालिका द्वारा लोक प्रशासन के कार्यों और फैसलों की न्यायिक समीक्षा करना ।

हां, लोक प्रशासन पर न्यायिक नियंत्रण आवश्यक है क्योकि यह लोक प्रशासन को कानून के दायरे में काम करने को सुनिश्चित करता है और यह लोक प्रशासन द्वारा लोगो के व्यक्तिगत और सामाजिक स्वंत्रता के अतिक्रमण को भी सुनिश्चित रोकता है। 


लोक प्रशासन पर न्यायिक नियंत्रण के विभिन्न संभावित रूप हैं, कुछ लोकप्रिय तरीके निम्नलिखित हैं:

न्यायिक समीक्षा: भारत सहित अधिकांश लोकतंत्रों में, न्यायपालिका को लोक प्रशासन या सरकार द्वारा किए गए किसी कार्य को न्यायिक समीक्षा का अधिकार हैं। यह लोक प्रशासन के कार्यो को असंवैधानिक या गैरकानूनी घोसित कर सकती है यदि वह सविधान के अनुसार कार्य ना कर रहा हो। न्यायपालिका की यह शक्ति सत्ता के दुरुपयोग को रोकने में मदद करती है और नागरिकों को बुनियादी मौलिक अधिकार को सुनिश्चित करती है।

न्यायपालिका जांच आयोग: लोक प्रशासन या सार्वजनिक संगठनों द्वारा भ्रष्ट कार्य या सत्ता के दुरुपयोग जैसे कदाचार के आरोपों के मामले में, न्यायिक जांच आयोग का गठन होता है जो आरोपों को जांच करता है और कानून के उल्लंघन के मामले में कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करता हैं।

लोकपाल अदालत: लोक प्रशासन के खिलाफ जनता से शिकायतों की जांच करने के लिए लोकपाल अदालत होते है जो सेवाओं की गुडवत्ता सुधारने के लिए सुझाव या सिफारिश करती है।


उपरोक्त लोक प्रशासन पर न्यायिक नियंत्रण के संभावित रूप हैं जो सार्वजनिक प्रशासन को स्थापित नियमों के भीतर काम करने के लिए और जनता के कल्याण के लिए जरुरी है।


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