पृष्ठभूमि :
भारत एक समृद्ध विविधता वाला देश है जहाँ हर जगह आपको अलग-अलग चीज़ें देखने को मिलती हैं चाहे भू-दृश्य, परिधान , खाने के तरीके, भाषाएँ, लिपियाँ, रीति-रिवाज़ और परंपराएँ।
रेल से सफ़र करते समय आप जरूर महसूस करते होंगे कि कुछ घंटों में ही नज़ारे, लोग और बोलचाल का तरीका बदल जाता है।
हमारे देश में 1.4 अरब से अधिक लोग है जो दुनिया की आबादी का लगभग 18% हिस्सा हैं। इतने बड़े और जिसका कई हजारो वर्ष का पुराना इतिहास हो , उस देश में यह विविधता स्वाभाविक है।
भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 4,635 समुदाय, 325 भाषाएँ और 25 लिपियाँ पाई जाती हैं।
कई लोग अपने जन्मस्थान से दूर रहकर अलग-अलग संस्कृतियों के बीच जीवन बिताते हैं, जिससे विविधता और भी बढ़ती है।
इतिहासकार विंसेंट स्मिथ ने कहा कि भारत की इतनी विविधता के बावजूद उसका इतिहास लिखा जा सकता है क्योंकि यहाँ “विविधता में एकता” है।
इसका मतलब है — भले ही हम अलग-अलग दिखते हों, अलग भाषाएँ बोलते हों, अलग त्योहार मनाते हों, लेकिन हम सब भारतीय हैं और एक साझा पहचान रखते हैं।
यही "एक में अनेक" भारत की असली खूबसूरती है।
भारत के विविधता के निम्न लिखित पहलू है :
सभी के लिए भोजन:
चावल, गेहूँ, जौ, बाजरा, ज्वार, रागी और विभिन्न दालें, ये ज़्यादातर भारतीयों का मुख्य भोजन हैं। इसलिए इन्हे "मुख्य आनाज " भी कहा जाता है।
इसी तरह, हल्दी, जीरा, इलायची, अदरक जैसे मसाले भी पूरे भारत में उपयोग होते हैं।
एक ही सामग्री (एकता) से अलग-अलग तरीकों से पकाकर असंख्य व्यंजन (विविधता) बनाए जा सकते हैं।
यानी भोजन में भी "विविधता में एकता" की झलक दिखाई देती है।
वस्त्र एवं परिधान:
भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों ने अपने-अपने वस्त्र और पहनावे की शैली विकसित की है।
फिर भी, कुछ परिधानों में एक समानता देखी जा सकती है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है — साड़ी।
इसके अनेक प्रकार है तथा पहनने के कई तरीके हैं, जो क्षेत्र और समुदाय के अनुसार बदलते हैं। लेकिन अंत में यह एक ही प्रकार का परिधान है।
त्योहारों की विविधता:
भारत में त्योहारों की बहुत बड़ी विविधता है।
कुछ त्योहार एक ही समय पर पूरे देश में मनाए जाते हैं, लेकिन उनके नाम अलग-अलग होते हैं।
उदाहरण के लिए — मकर संक्रांति, जो 14 जनवरी के आसपास फसलों की कटाई के समय मनाई जाती है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग नामों और तरीकों से मनाया जाता है, जैसे —
- पोंगल (तमिलनाडु)
- उतरायण (गुजरात)
- लोहड़ी (पंजाब)
- माघ बिहू (असम)
अक्टूबर-नवंबर के महीनों में भी भारत में कई प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं, जैसे —
- दीपावली
- दुर्गा पूजा
- गुरुपर्व
- छठ पूजा
- ईद (कभी-कभी इसी समय पड़ती है)
यह विविधता भारत की संस्कृति की समृद्धि और एकता में अनेकता को दर्शाती है।
महाकाव्य का विस्तार:
भारतीय साहित्य विविधता में एकता का श्रेष्ठ उदाहरण है। भाषा और शैली में भिन्नता के बावजूद, यह सदियों से साझा विचार और मूल्य प्रस्तुत करता आया है।
पंचतंत्र: 2,200 वर्ष पुरानी संस्कृत रचना, जिसमें पशुओं के माध्यम से जीवन-कौशल सिखाने वाली कहानियाँ हैं। इसके 50+ भाषाओं में 200+ रूपांतरण हुए और यह भारत से बाहर भी लोकप्रिय है।
रामायण और महाभारत: संस्कृत के दो महान महाकाव्य, जिनमें भगवान धर्म की स्थापना के लिए संघर्ष करते हैं।
इनमें अनेक उपकथाएँ हैं जो नैतिक मूल्यों पर केंद्रित हैं।
इन महाकाव्यों का 2,000+ वर्षों से अनुवाद और रूपांतरण होता रहा है। पूरे भारत में इनके लोकसंस्करण मौजूद हैं — केवल तमिलनाडु में ही महाभारत के 100 से अधिक रूप पाए गए।
कई जनजातियाँ (जैसे भील, गोंड, मुण्डा, पूर्वोत्तर और हिमालय क्षेत्र की जातियाँ) अपने लोककथाओं में रामायण या महाभारत को अपने इतिहास से जोड़ती हैं।
जनश्रुतियों के अनुसार, पांडव और अन्य पात्र भारत के लगभग हर क्षेत्र में गए थे।
इन महाकाव्यों ने भारत और एशिया के विभिन्न हिस्सों को एक सांस्कृतिक सूत्र में बाँधा है। यह स्पष्ट करता है कि भारतीय संस्कृति विविधता को अपनाती है, लेकिन उसकी अंतर्निहित एकता को भी सहेजती है।
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