बिग बैंग सिद्धांत का विस्तार से वर्णन करें

 Big bang theory बिग बैंग सिद्धांत | भू- आकरिकी | भौतिक भूगोल


 Big bang theory बिग बैंग सिद्धांत:

"पृथ्वी की उत्पत्ति और संरचना" के बारे में प्रारंभिक सिद्धांत/परिकल्पना केवल सौर मंडल के विकास के जानने पर केंद्रित थे, लेकिन आधुनिक सिद्धांत जैसे कि "बिग बैंग सिद्धांत" ब्रह्मांड की उत्पत्ति, सौर मंडल के विकास, भू-पर्पटी और वायुमंडल आदि का विकास, जैसी समस्याओं को हल करने का प्रयास करता है। 

बिग बैंग सिद्धांत आधुनिक सिद्धांत है और इसे विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना भी कहा जाता है; ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़े कई सवालों को हल करने की कोशिश करता है।

बिग बैंग थ्योरी को विस्तार ब्रह्मांड परिकल्पना सिद्धांत भी क्यों कहा जाता है?

1920 में, एडविन हबल ने सबूत दिया कि ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है। उनका मानना था कि समय के साथ आकाशगंगाओं के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं।

ब्रह्मांड के विस्तार के दो प्रमाण निम्नलिखित हैं: 

  • डॉपलर प्रभाव।
    • यह पाया गया है कि तारे से उत्सर्जित प्रकाशतरंग दैर्ध्य ( wavelength)  समय के साथ फैल रहा है, जिसका अर्थ है कि तारे हमसे दूर जा रहे हैं।
  • अंतरिक्ष में कॉस्मिक माइक्रोवेव ( cosmic microwave ) का पता लगाना।
    • वैज्ञानिक ने उस ब्रह्मांडीय तरंग की खोज की है जिसकी उत्पत्ति बिग बैंग समय (यानी 13.7 अरब साल पहले) से हुई थी। इसका मतलब है कि ब्रह्मांड अभी भी विस्तार कर रहा है।


बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार:

ब्रह्मांड का निर्माण करने वाले सभी पदार्थ एक बिंदु में मौजूद थे, जिसे अति छोटे गोलक ( एकाकी परमाणु /Singularity) कहा जाता है, जिसमें परमाणु के क्षेत्रफल से कम अकल्पनीय छोटी आयत, अनंत तापमान और अनंत घनत्व होता है।

  • बिग बैंग की शुरुआत लगभग 13.7 अरब साल पहले एक बड़े धमाके के साथ हुआ था।
  • महाविस्फोट की घटना के 3 मिनट के भीतर ही पहला परमाणु बन गया।
  • समय के साथ, ऊर्जा पदार्थ में परिवर्तित हो गई।
  • बिग बैंग धमाके के करीब 3 लाख साल बाद ब्रह्मांड पारदर्शी हो जाता है।

बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार तारे का निर्माण:

  • तारे का निर्माण 5 अरब साल पहले शुरू हुआ था।
  • प्रारंभिक ब्रह्मांड में, पदार्थ और ऊर्जा का वितरण भी नहीं था। प्रारंभिक घनत्व अंतर के कारण, गुरुत्वाकर्षण बलों में भिन्नता आई ।  इसके चलते पदार्थ आपस में इकट्ठा होने लगा और यही एकत्र पदार्थ बाद में आकाशगंगा के विकास का आधार बना । निर्माण के आरंभिक समय में  हाइड्रोजन गैस के विशाल बादल बने जिसे निहारिका ( Nebula) कहा गया। इन्ही निहारिका में गैसों के संलयन  से तारो का निर्माण होने लगा |


बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार ग्रहों का  निर्माण:

ग्रहों के विकास में निम्नलिखित चरण हैं:

प्रथम चरण:

  • तारा नीहारिका के भीतर गैस की गुंथित झुंड है। गुंथित झुंड के भीतर गुरुत्वाकर्षण बल से कोर का निर्माण होता है और गैसीय, कोर के चारों ओर गैसों और धूल के विशाल घूर्णन डिस्क बनते हैं।

दूसरे चरण:

  • गैसीय बदल का संघनन से गृहाणु (Planetesimals) विकसित होने लगे 

अंतिम चरण:

  • बाद में इन्ही गृहाणु के संघटन से बड़े पिंड बनाने लगे। 


पृथ्वी का विकास:

प्रारंभ में, पृथ्वी हाइड्रोजन और हीलियम के पतले वातावरण के साथ एक बंजर, चट्टानी और गर्म वस्तु थी। पृथ्वी की संरचना परतदार है, वायुमंडल से पृथ्वी के कोर तक ये घन्नत्व  के आधार पे विकसित  हुए है 

स्थलमंडल का विकास

पृथ्वी का स्थलमंडल का विकास बहुत सारे गृहाणु से मिलकर बना है जब गृहाणु इकट्ठा हो रहे थे तो बहुत सारे  उष्मा उत्तपन्न हुआ और सारे  गृहाणु पिघलकर एक बड़ा पिंड बना ; अत्यधिक तापमान के कारण  ज्यादा घनत्व वाले पदार्थ  पृथ्वी के कोर बने और  हलके  पदार्थ पृथ्वी के ऊपरी भाग में आ गए ; जब बहुत बडे  टकराव से पृथ्वी से चन्द्रमा बना तो पृथ्वी फिर से गरम हुआ; और पृथ्वी के अनेक परते बने जिसमे से तीन मुख्य है 

ये तीन परतें हैं:

  • भूपर्पटी ( The Crust)
  • प्रवार या मैंटल ( Mantle)
  • क्रोड (Core)


वायुमंडल और जलमंडल का विकास

तीन चरणों से वर्तमान वायुमंडल बना:

पहले चरण:

  •  सौर हवाओं  के कारण से हीलियम और हाइड्रोजन जैसे मौलिक हल्के गैस का वायुमंडल से ह्रास हुआ।

दूसरे चरण:

  • दूसरे चरण में पृथ्वी के गर्म आंतरिक भाग से गैसें और जलवाष्प वायुमंडल में बाहर आ गए  इस स्तर पर, वायुमंडल में मुख्य रूप से जल वाष्प, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, अमोनिया और बहुत कम मुक्त ऑक्सीजन शामिल है। इस प्रक्रिया को डीगैसिंग कहा जाता है।

तीसरा चरण:

  • प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से वातावरण की संरचना में बदलाव आया और ऑक्सीजन वातावरण में बाढ़ जैसे बढ़ गया ।
  • वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड वर्षा जल में घुल गई और और उसकी मात्रा कम हो गई ।

जीवन की उत्पत्ति:

जीवन की उत्पत्ति एक प्रकार की रासायनिक प्रतिक्रिया है। यह अकार्बनिक पदार्थों से आया है। 3800 मिलियन वर्ष पहले नीले शैवाल से जीवन विकसित होना शुरू हुआ।


You may like also:


Previous
Next Post »