पृथ्वी के विकास के समन्धी अवस्थाओं को बताते हुए हर अवस्था/ चरण को संक्षेप में वर्णित करें ।

  पृथ्वी के विकास के समन्धी अवस्थाओं को बताते हुए हर अवस्था/ चरण को संक्षेप में वर्णित करें ।

उत्तर :

हमारी पृथ्वी की उत्पत्ति 4.6 अरब वर्ष पहले  हुई थी तब से अब तक पृथ्वी विकसित कर रही है । प्रारंभ में, पृथ्वी हाइड्रोजन और हीलियम के पतले वातावरण के साथ एक बंजर, चट्टानी और गर्म वस्तु के रूप में थी, अब हमारे पास एक हरा-भरा वातावरण है जो जीवन को संभव बनाया है।

हमारी पृथ्वी के चार प्रमुख घटक हैं, इन चार घटकों के विकास को समझकर पृथ्वी के विकास को समझा जा सकता है।

  •  स्थलमंडल  विकास 
  • वातावरण का विकास
  • जलमंडल का विकास
  • जीवमंडल का विकास


स्थलमंडल का विकास

स्थलमंडल पृथ्वी का एक ठोस भाग है। विभेदन की प्रक्रिया( process of differentiation) के कारण वर्तमान स्थलमंडल का विकास हुआ। हल्के पदार्थों और सघन पदार्थों के पृथक्करण को विभेदन की प्रक्रिया कहा जाता है। पृथ्वी की परत के निर्माण और विभेदीकरण की प्रक्रिया दो चरणों में हुई:

  • प्रारंभिक अवस्था में, पृथ्वी के अंदर घनत्व में क्रमिक वृद्धि से तापमान में वृद्धि होती है। परिणामस्वरूप, पृथ्वी के अंदर की सामग्री घनत्व के आधार पर अलग होने लगी; लोहे जैसे भारी पदार्थ क्रोड (core) की  ओर चले गए और हल्के पदार्थ जैसे सिलिकॉन और एल्युमिनियम सतह ( Crust) की ओर आ गये  हैं। इससे बाहरी सतह का विकास हुआ जिसे भूपर्पटी  कहा जाता है।
  • दूसरे चरण में, चंद्रमा के निर्माण के दौरान और विशाल टक्कर ( giant impact) के कारण, पृथ्वी और अधिक गर्म हो गई और विभेदन की प्रक्रिया फिर से हुई जिससे पृथ्वी की  तीन-परत का निर्माण हुआ जो भूपर्पटी(crust), मैंटल (Mantle), और क्रोड (Core) है।

वायुमंडल और जलमंडल का विकास

तीन चरणों से बना वर्तमान वातावरण:

पहले चरण:

  • सोलर हवा (solar winds) के कारण, हीलियम और हाइड्रोजन जैसे मौलिक  गैस वायुमंडल से ह्रास हुआ । पृथ्वी के छोटे आकार (कम गुरुत्वाकर्षण बल) के कारण, पृथ्वी इन गैसों को को अंतरिक्ष में उड़ने से रोक नहीं पाई ।

दूसरे चरण:

  • पृथ्वी के गर्म आंतरिक भाग ने वायुमंडल के विकास में योगदान दिया। पृथ्वी के ठंडा होने के प्रकिया में , पृथ्वी के आंतरिक भाग से गैसें और जलवाष्प वायुमंडल में बाहर आ गए। इस स्तर पर, वायुमंडल में मुख्य रूप से जल वाष्प, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, अमोनिया और बहुत कम ऑक्सीजन शामिल थे । इस प्रक्रिया को डीगैसिंग कहा जाता है।

तीसरा चरण:

  • प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से जीवित जीवों द्वारा वातावरण की संरचना को संशोधित किया और ऑक्सीजन ने वातावरण में बाढ़ जैसे बढ़ना शुरू हुआ ।
  • वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड वर्षा जल में घुल गई और और कम हो गई जिससे अधिक संघनन और अधिक वर्षा हुई जिससे जलमंडल का विकास हुआ ।


जीवमंडल का विकास या जीवन की उत्पत्ति:

जीवन की उत्पत्ति एक प्रकार की रासायनिक प्रक्रियाहै। सबसे पहले, जटिल कार्बनिक अणु अकार्बनिक चीजों से उत्पन्न हुए थे और वे स्वयं जैसा बना सकते थे। लगभग 3000 मिलियन वर्ष पहले, नील शैवाल से जीवन की शुरुआत हुई थी।


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