"बहिर्जनिक भू आकृतिक प्रक्रियाएँ अपनी अंतिम ऊर्जा सूर्य की गर्मी से प्राप्त करती है | " व्याख्या कीजिये |

 प्रश्न

"बहिर्जनिक भू आकृतिक प्रक्रियाएँ अपनी अंतिम ऊर्जा सूर्य की गर्मी से प्राप्त करती है | " व्याख्या कीजिये | 

उत्त्तर 

बहिर्जनिक बल बाहरी बल हैं जो वातावरण में उत्पन्न होते हैं और यह अपना ऊर्जा मुख्यतः सूर्य से प्राप्त करते है । बहिर्जात बलों का मुख्य कार्य पृथ्वी की सतह को समतल करना है।

प्रमुख बहिर्जनिक भू-आकृति प्रक्रिया निम्नलिखित हैं:

  • अपक्षय [यह यांत्रिक, रासायनिक या जैविक हो सकता है
  • क्षरण और परिवहन।
  • गुरुत्वाकर्षण बलों के कारण बृहत् संचलन ।

बृहत् संचलन का ऊर्जा स्रोत विवर्तनिक बल हैं। टेक्टोनिक या विवर्तनिक बलों के कारण पृथ्वी की सतह पर ढाल पैदा हो जाते है । गुरुत्वाकर्षण बल (बहिर्जात बलों में से एक) ढलान वाली सतह पर कार्य करता है और सामग्री पर गति उत्पन्न करता है इससे पदार्थ में खिचाव उतपन्न होता है और टूट जाता है | 

अपक्षय, अपरदन और परिवहन प्रक्रिया का ऊर्जा स्रोत सूर्य है। इन्सुलेशन का वितरण सभी अक्षांशों में समान नहीं है; परिणामस्वरूप, यह वातावरण में दबाव और तापमान के अंतर का कारण बनता है; नतीजतन,

  • यह वर्षा का कारण बनता है जो रासायनिक, जैविक अपक्षय और क्षरण गतिविधियों को बढ़ाता है।
  • यह तापमान अंतर पैदा करता है जो अपक्षय गतिविधियों को बढ़ाता है।
  • समुद्र की लहरें, बर्फ, हवाएं भी सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करती हैं और विभिन्न अनाच्छादन प्रक्रियाओं पर काम करती हैं।

उपरोक्त तर्क से हम कह सकते है कि यदि सूर्य न होता तो हमारे वातावरण में ताप और दाब में अंतर पैदा नहीं होती और न ही वर्षा और हवाएं चलते और नहीं ही अपक्षय, अपरदन और परिवहन प्रक्रिया जैसे बहिर्जनिक भू आकृतिक प्रक्रियाएँ होती | 


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