भारत में जनजातियों के उत्थान हेतु अपने सुझाव दीजिये।

 प्रश्न। 

भारत में जनजातियों के उत्थान हेतु अपने सुझाव दीजिये। ( UPPSC, 2020, 15 Marks)

उत्तर।

भारत में जनजातियाँ सबसे पुरानी निवासी हैं। 2011 के अनुसार, आदिवासी आबादी भारत की कुल आबादी का 8.6% (104 मिलियन) है।

भारत में जनजातियों के उत्थान के लिए निम्नलिखित सुझाव हैं:

जनजातीय अर्थव्यवस्था:

भारत में जनजातियाँ अपनी आजीविका के लिए बड़े पैमाने पर वानिकी और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं।

हमें इस पर ध्यान देना चाहिए:

  • आदिवासी भूमि पर सिंचाई की उपलब्धता
  • गुणवत्तापूर्ण बीज, खाद, कीटनाशक की उपलब्धता सुनिश्चित करें
  • कृषि और वानिकी पर  जनजातियाँ को कौशल का प्रशिक्षण कराना। 
  • जनजातीय उत्पादों की बाजार तक पहुंच को सक्षम बनाना।
  • जनजातीय क्षेत्रों में सड़कों, राजमार्गों, पुलों आदि जैसे मजबूत बुनियादी ढांचे का विकास करना ।


शिक्षा सुविधाएं:

भारत में जनजातियां काफी हद तक अशिक्षित हैं और उनकी साक्षरता दर कम है। आज की विश्व में, शिक्षा उपलब्ध संसाधनों के उपयोग का एक नया तरीका प्रदान करती है और निरक्षरता सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रमुख बाधा है।

हमें इस पर ध्यान देना चाहिए:

  • आदिवासी क्षेत्रों में छात्रावास सुविधाओं के साथ शिक्षा की गुणवत्ता उपलब्द कराना ।
  • हमें एकलव्य स्कूलों और आदर्श निवासी स्कूलों को मजबूत करना होगा। 


स्वास्थ्य और स्वच्छता सुविधाएं:

जनजातीय क्षेत्रों में मातृत्व और शिशु मृत्यु दर अधिक है।

हमें इस पर ध्यान देना चाहिए:

  • नवजात शिशुओं के सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसूति अस्पताल और बच्चे की देखभाल के लिए शिशु अस्पताल को सभी आदिवासियो के लिए उपलब्द कराना ।
  • हम प्रत्येक आदिवासी जिले में कम  से कम एक चिकित्सा अस्पताल को शुरू करना चाहिए। 
  • सभी आदिवासी आबादी के लिए सुरक्षित पानी और स्वच्छता सेवा उपलब्ध होनी चाहिए।


खाद्य और पोषण सुरक्षा:

  • भारतीय राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, अन्य सामाजिक समूहों की तुलना में आदिवासी बच्चों और महिलाओं में कुपोषण अधिक है।
  • हमें जनजातीय क्षेत्रों में संतुलित आहार की पहुंच के लिए पीडीएस प्रणाली को मजबूत करना चाहिए।


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