मानव भूगोल में नव-निश्चयवाद या रुको और जाओ निश्चयवाद की अवधारणा की व्याख्या करें।

 प्रश्न । 

मानव भूगोल में नव-निश्चयवाद या रुको और जाओ निश्चयवाद की अवधारणा की व्याख्या करें।

कक्षा 12: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत, अध्याय 1 मानव भूगोल-प्रकृति एवं विषय क्षेत्र)

उत्तर।

ब्रिटिश भूगोलवेत्ता, ग्रिफ़िथ टेलर ने भूगोल में नव-निर्धारणवाद या रुको और जाओ निश्चयवाद की( स्टॉप एंड गो नियतत्ववाद) अवधारणा पेश की जो पर्यावरण नियतत्ववाद और संभववाद (संभावनावाद) के मध्य विचारों को दर्शाती है। न तो प्रकृति हमें पूरी तरह से नियंत्रित करती है( जैसा पर्यावरण नियतिवाद द्वारा प्रतिपादित किया गया ) और न ही यह हमें पर्यावरण को संशोधित करने की पूर्ण स्वतंत्रता देती है (जैसा कि संभावनावाद विचार द्वारा प्रतिपादित किया गया है)। इसका मतलब है कि मानव को अपने विकास तथा पर्यावरण में बदलाव के लिए बीच का रास्ता अपनाना होगा। मानव प्रकृति के नियमो को पालन कर प्रकृति को जीत सकता है।

नव-निर्धारणवाद या रुको और जाओ निश्चयवाद की की अवधारणा के अनुसार, भौतिक वातावरण (प्रकृति) एक यातायात नियंत्रक की तरह काम करता है;

(हरी बत्ती); प्रकृति हमें प्रकृति को संशोधित करने की अनुमति देती है तो हमें विकास के लिए जाना चाहिए।

(लाल बत्ती); जब प्रकृति हमें  प्रकृति को संशोधित करने की अनुमति नहीं देती है, हमें इसे रोकना चाहिए अन्यथा यह हमें प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप, सुनामी, ओजोन रिक्तीकरण आदि से नुकसान पहुंचाएगा।

प्रकृति ने हमें संभावनाएं दी हैं लेकिन संभावनाओं को उस सीमा के भीतर बनाया जा सकता है जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए। दुर्घटना के बिना कोई फ्री रन नहीं है; देश के मुफ्त विकास के परिणामस्वरूप ग्रीनहाउस गैस प्रभाव, ओजोन परत की कमी, ग्लोबल वार्मिंग, भूमि का क्षरण आदि जैसी दुर्घटनाएँ हुईं। प्रकृति हमें इन छोटी दुर्घटनाओं से बचने के लिए अपने कार्यों को सही करने का समय देती है।

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