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क्रान्तिकारी भूगोल | रेडिकल भूगोल | भूगोल में उग्रवादी विचारधारा

रेडिकल भूगोल की विचारधारा कभी हद तक कार्ल मार्क्स की विचारधारा से मिलती है।  1970 के दशक के दौरान, क्रान्तिकारी भूगोल का विकास हुआ। भूगोल में उग्रवादी विचारधारा ( क्रान्तिकारी विचार)  के विकास के लिए निम्नलिखित कारण जिम्मेदार थे:

  • मात्रात्मक क्रांति से भूगोलवेत्ताओं को भारी असंतोष था क्योकि इसने भूगोल में अमानवीय तरीका का उपयोग किया था, इस कारण से क्रान्तिकारी भूगोल का विकास हुआ। 
  • प्रत्यक्षवाद, शेफर के विचार और मात्रात्मक दृष्टिकोण ने भूगोल में तर्कसंगत और योग्यता-आधारित गतिविधियों का समर्थन किया जो समाज में लाभ-निर्माण और पूंजीवाद को बढ़ावा देता हैं। फलत: कुछ स्थान और कुछ लोगो का विकास ज्यादा होता है , फलस्वरूप सामाजिक असमानता, क्षेत्रीय विषमता, लिंग भेद तथा जातिगत भेदभाव में वृद्धि होता हैं।
  • 1960 के दौरान, वियतनाम युद्ध और संयुक्त राज्य अमेरिका में काले लोगों के खिलाफ भेदभाव से क्रान्तिकारी भूगोल के विकास का तत्कालीन कारण थे।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे पूंजीवादी देशों में सामाजिक आर्थिक असमानता के परिणामस्वरूप भूगोल में क्रांतिकारी विचारधारा का उदय हुआ।

1969 में, मानव भूगोल के प्रोफेसर रिचर्ड पीट और आर्थिक भूगोल के प्रोफेसर डेविड हार्वे ने अपनी पत्रिका में भूगोल में क्रांतिकारी विचारधारा के समर्थन के बारे में कई लेख लिखे, जिसके परिणामस्वरूप क्रांतिकारी भूगोल का विकास हुआ।

रेडिकल भूगोल की कुछ दार्शनिक विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • यह श्रम मूल्यों का समर्थन करता हैं और यह स्वतंत्र और योग्यता आधारित दृष्टिकोण के खिलाफ है।
  • यह समाज में केवल आर्थिक वर्ग में विश्वास करता है और यह भूगोल में धर्म, नैतिकता, संस्कृति और व्यक्तिगत पसंद के महत्व को बढ़ावा नहीं करता है।
  • यह घर, कार्यस्थल, धार्मिक स्थान और राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं के समान अवसर और उपचार का समर्थन करता है।
  • यह भूगोल में महिलाओं की भागीदारी का समर्थन करता है
  • यह उपनिवेशवाद और मात्रात्मक क्रांति का विरोध करता है।
  • यह कल्याणकारी भूगोल और मानवतावाद भूगोल का समर्थन करता है। 
  • यह लाभ के उद्देश्य के विकास का विरोध करता हैं। 
  • यह पूंजीवाद के खिलाफ और राष्ट्रवाद के खिलाफ, समाजवाद का समर्थन करता है। 
  • यह अमेरिका में गोरे वर्चस्व और यूरोप का नस्लीय और जलवायु वर्चस्व जैसे सिद्धांत को खारिज करता है।

क्रान्तिकारी भूगोल की आलोचना :

क्रान्तिकारी  भूगोल की प्रमुख आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:

  • रैडिकल भूगोल का दार्शनिक आधार भूगोल की रेखा के विरुद्ध है।
  • यह कम लचीला है और इसे लागू करना बहुत कठिन है।
  • यह मार्क्सवाद दर्शन का समर्थन करता है और यूएसएसआर में मार्क्सवाद दर्शन सफल नहीं हुआ था।

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